उत्तर प्रदेशबस्ती

जिला महिला अस्पताल बना ‘रेफर सेंटर’, आईसीयू और ब्लड बैंक के अभाव में गर्भवती महिलाओं की जान पर आफत

बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसा बस्ती का महिला अस्पताल, गंभीर प्रसूताओं को भेजा जा रहा मेडिकल कॉलेज; आईसीयू न होने से बढ़ी मरीजों की मुसीबत, जिला महिला अस्पताल में हर दिन रेफर हो रहे 3 से 4 गंभीर मरीज

अजीत मिश्रा (खोजी)

आईसीयू और ब्लड बैंक का अभाव: जिला महिला अस्पताल बना ‘रेफर सेंटर’, गर्भवती महिलाओं की जान पर आफत

  • बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं: सुविधाओं के अभाव में रेफर सेंटर बना महिला अस्पताल

बस्ती: जिले के स्वास्थ्य ढांचे में बड़ी खामी उजागर हुई है। जिला महिला अस्पताल में आईसीयू (ICU) और ब्लड बैंक जैसी जीवन रक्षक सुविधाओं के अभाव के कारण गंभीर स्थिति वाली गर्भवती महिलाओं को मजबूरी में मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।

रोजाना रेफर हो रहे गंभीर मरीज

​अस्पताल की लचर व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ रोजाना औसतन तीन से चार गंभीर गर्भवती महिलाओं को रेफर किया जा रहा है। इसके चलते गरीब मरीज निजी अस्पतालों की भारी-भरकम फीस चुकाने को मजबूर हैं, वहीं समय पर उपचार न मिलने से उनकी जान पर भी जोखिम बना रहता है।

अस्पताल की स्थिति यह है कि यहाँ रोजाना औसतन तीन से चार गंभीर मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है।

  • ​आईसीयू और ब्लड बैंक जैसी सुविधाएं न होने के कारण, गंभीर मरीजों का इलाज करना अस्पताल के लिए कठिन हो गया है।
  • ​निजी अस्पतालों में भारी खर्च और मेडिकल कॉलेज की दौड़-धूप के कारण मरीजों के परिजन परेशान हैं।
  • ​समय पर इलाज न मिलने से गर्भवती महिलाओं के जीवन पर भी जोखिम बना रहता है।

आंकड़ों में स्थिति

​अस्पताल में प्रसव की दर और रेफर मामलों का विवरण इस प्रकार है:

  • वार्षिक प्रसव आंकड़े: वर्ष 2024-25 में 3382 और 2025-26 (अप्रैल से अब तक) में 788 प्रसव हुए हैं।
  • जून माह का प्रदर्शन: जून 2026 में अस्पताल में कुल 600 प्रसव दर्ज किए गए।
  • जुलाई का हाल: जुलाई माह के महज एक सप्ताह के भीतर दर्जनों महिलाएं रेफर की गईं, जिनमें से कुछ दिनों में 3 से 5 मरीज रोजाना रेफर किए गए।

एक केस स्टडी: इलाज के नाम पर दौड़-धूप

​अखबार में प्रकाशित एक मामले के अनुसार, अस्पताल में भर्ती एक गर्भवती महिला को प्लेटलेट्स कम (79 हजार) होने के कारण मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज जाने पर मरीज की स्थिति और बिगड़ गई और प्लेटलेट्स गिरकर 295 तक पहुंच गए, जिससे परिजन मानसिक और आर्थिक रूप से बुरी तरह टूट गए।

अस्पताल प्रशासन की सफाई

​जिला महिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक अनिल कुमार ने बताया:

  • ​अस्पताल में ब्लड बैंक और जनरल यूनिट की तैयारी के लिए प्रयास चल रहे हैं।
  • ​अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञों की भारी कमी है; स्वीकृत पदों के सापेक्ष बहुत कम डॉक्टर तैनात हैं।
  • ​आईसीयू वार्ड न होने के कारण गंभीर मरीजों को ऑपरेट करना असंभव हो जाता है, जिसके चलते उन्हें रेफर करना पड़ता है।

​अस्पताल प्रशासन ने इस दिशा में शासन से तत्काल हस्तक्षेप और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!